ये भगवा आतंकवाद क्या है चिंदबरम जीदेश में आतंकवादी ख़तरा बरकरार है और देश के गृह मंत्री राज्यों के पुलिस प्रमुखों की बैठक में इन ख़तरों से निपटने के बजाय 'भगवा आतंकवाद' की नई शब्दावली गढ़ने में जुटे हैं। क्या यह तथाकथित धर्मनिरपेक्षता का दंभ भरने वालों की राजनीति है जो मुस्लिम वोट की सियासत के लिए भगवा या केसरिया आतंकवाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं ? या फिर इसके पीछे देश को टुकड़ों में बांट देने की कोई बहुत बड़ी साज़िश है।
'भगवा आतंकवाद' का नाम लेकर क्या गृह मंत्री पड़ोसी मुल्क और अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों को ये संदेश देना चाहते हैं कि अब देश को सीमा पार आतंकवाद से ख़तरा नहीं रह गया है ? और हिंदुस्तान के सामने अब सबसे पड़ा ख़तरा देश के भीतर पनप रहे आतंकवाद से है।
मैं
भारत का नागरिक हूं और मेरी जाति ‘भारतीय’ है, क्या लोकतंत्र
में किसी भी सरकार को अपने नागरिक को मूलभूत सुविधाएं मुहैया
कराने के लिए इससे ज़्यादा जानने की ज़रुरत है। अगर हम सामाजिक-आर्थिक
विकास से जुड़ी योजनाओं को लागू करने में जाति और धर्म के
हिसाब से फैसले करने लगे तो समाज कई टुकड़ों में बंटा नज़र
आएगा और आने वाले बरसों में इसके गंभीर नतीजे देश को भुगतने
होंगे।
आज़ाद
भारत में गुलाम क़ानून
भोपाल गैस कांड पर अदालत के फैसले और इस पूरे मसले
पर चल रही राजनीति ने भारतीय न्यायिक व्यवस्था के साथ ही
विधायिका और कार्यपालिका को भी सवालों के घेरे में लाकर
खड़ा कर दिया है। आखिर कब तक हम एक दूसरे की आंख में धूल
झोंकते रहेंगे ? और बड़ी से बड़ी त्रासदी या संकट पर हम
दुनिया को संदेश देते रहेंगे कि हम भारतीयों की जान की कोई
कीमत नहीं हैं..। आज़ाद भारत में गुलाम क़ानून
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खाद्य तेल के ज़रिए दिल
का ख़्याल रखने की बात करने वाली एक कंपनी को नोटिस भेजा
है और अब फूड प्रोसेसिंग एजेंसी कंपनी के दावे की जांच कर
रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। दूध में एक ख़ास पाउडर मिलाकर
पीने से लंबाई बढ़ने का दावा ब्रिटेन में हुई शोध में ख़ारिज़
हो चुका है। गलत जानकारी के आधार पर ग्राहकों को धोखा देने
का सिलसिला अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में शायद
आपको ये भी सुनने को मिले कि क्या आपके टूथपेस्ट में चाकलेट
हैं। बड़बोले विज्ञापनों की बौछार... पूरा लेख दैनिक जागरण
में
अलगवाद
की राजनीती मैं ठाकरे परिवार ओ क्या नुक्सान हुआ यह तोह
बाद की बात है ,हां इतना ज़रूर है की ठाकरे कुनबा खुद अलगावाद
का शिकार हो गया
ब्रांड के चक्कर और टी वी विज्ञापनों के चक्करों में आकर ऐसे
प्रॉटक्ट्स खरीदने वालों की थोड़ी सी आंख तो खुलेगी...लेकिन
करोड़ो रूपये लेकर विज्ञापन करने वाले स्टार्स और खिलाड़ियों
को शर्म तो आती नहीं होगी....जिस पाउडर की आप बात कर रहे है
उसका तो एड सचिन कर ही रहे है....
Raj Haritwal
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