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एक तरफ कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी महंगे आलू के चिप्स के बहाने किसानों को फायदा पहुंचाने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ यूपीए सरकार खाद्य सुरक्षा कानून के ज़रिए गरीबों को दो जून की रोटी का कानूनी अधिकार देने जा रही है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि सरकार कब तक कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी नफे नुकसान के तराजू में तोलकर लागू करने के फैसले लेगी? 
पूरा लेख दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण में

जागरण राष्ट्रीय संस्करण : 23 June 2011 : संघ का दबाव और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए उमा भारती की भाजपा में वापसी तो हो गई है लेकिन पार्टी में अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। महाराष्ट्र में गोपीनाथ मुंडे कांग्रेस के संपर्क में है तो उत्तर प्रदेश में भाजपा के कई नेताओं को उमा के आगे अपना कद बौना दिखाई दे रहा है। उमा की वापसी और भाजपा के भविष्य पर आप लोग क्या सोचते हैं...पूरा लेख दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण में
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Dear Friends, manuscript of my first book ‘MERI JATI BHARTIYA’, have been selected by the Jury for Bhartendu Harishchandra Award 2010. I will receive the first prize in the "National Integration" category on 28 Dec 2011.The award function will be at PIB Hall, Shastri Bhawan at 4 PM. Bhartendu Harishchandra Awards were instituted in 1983. These Awards are given by the Ministry of Information & Broadcasting every year to promote original writings in Hindi. 

वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभ लेखक, डॉ शिव कुमार राय की राष्ट्रीय एकता पर आने वाली पुस्तक, ‘मेरी जाति भारतीय’ की पांडुलिपि को भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार 2010 के लिए चुना गया है। जूरी ने डॉ. राय की पांडुलिपि को प्रथम पुरस्कार देने का फैसला किया है। प्रतिष्ठित भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार की स्थापना हिन्दी में उत्कृष्ट मूल लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए 1983 में की गई थी। सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दिया जाने वाले यह पुरस्कार पत्रकारिता एवं जनसंचार, राष्ट्रीय एकता, महिला संबंधी विषयों और बाल साहित्य श्रेणी में दिया जाता है।
 
राष्ट्रीय एकता श्रेणी में डॉ शिव कुमार राय को यह पुरस्कार 28 दिसंबर 2011 को पीआईबी हॉल, शास्त्री भवन में शाम 4 बजे दिया जाएगा। डॉ शिव कुमार राय पिछले 17 बरसों से भी ज़्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। ‘नवभारत’, ‘दैनिक जागरण’, ‘ज़ी न्यूज़’, ‘आज तक’ जैसे चैनलों में काम कर चुके डॉ. राय इन दिनों स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर अपनी भूमिका को बखूबी निभा रहे हैं। ‘दैनिक जागरण’, ‘राष्ट्रीय सन्मार्ग’, ‘स्वतंत्र वार्ता’ जैसे अखबारों के संपादकीय पन्नों पर उनकी कलम निरंतर चलती रहती है। आत्महत्याओं पर किए गए समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिए उन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। 


ओसामा  के बहाने तुष्टिकरण  का तीर जागरण राष्ट्रीय संस्करण : 07 May 2011 : दुनिया का सबसे खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह एक प्रेस कांफ्रेंस में मारे गए इस खतरनाक आतंकवादी को ओसामा जी कहकर संबोधित किया। इससे पहले अल कायदा के इस आतंकवादी को समुद्र में दफनाए जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा था कि कोई चाहे जितना बड़ा आतंकवादी हो, लेकिन मरने के बाद उसका अंतिम संस्कार उसके धार्मिक रीति-रिवाज से ही करना चाहिए। यह कोई पहला वाकया नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने इस तरह का बयान दिया है।

 

केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का कहना है कि अगर गरीब बच्चों को स्कूल भेजे जाने की कोई व्यवस्था नहीं है तो इसमें लोकपाल क्या करेगा ? आज़ादी के बाद से अब तक 80 आम बजट पेश हो चुके हैं और हर बजट में सामाजिक योजनाओं के लिए हज़ारों करोड़ रुपये का प्रावधान होता है। कपिल सिब्बल बताएं कि इसके बाद भी देश की तस्वीर क्यों नहीं बदली?

जागरण राष्ट्रीय संस्करण : 12 April 2011
 समाज सुधारक अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार को लेकर शुरू किए आंदोलन और उसको मिले जनसमर्थन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर हमारे इरादे मजबूत और नीयत साफ हो तो देश की जनता सरकार की चूलें हिलाने के लिए एकजुट हो सकती है। अन्ना के अनशन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों की बुलंद होती आवाज के आगे भले ही सरकार लोकपाल विधेयक मामले पर घुटने टेकती नजर आ रही हो, लेकिन इस पूरे मामले में चली कवायद और हाल ही में कपिल सिब्बल के बयान ने इस पूरे मामले में सरकार की नीयत पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। लोकपाल बिल पर सरकार की तरफ से बनी सहमति के बाद जब अन्ना हजारे ने अनशन तोड़ा तो उस वक्त इस पूरे मसले पर सरकार की तरफ से वार्ताकार रहे कपिल सिब्बल को यह (लेखक डॉ. शिव कुमार राय)


लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री क्यों नहीं

लोकपाल बिल को लेकर सरकार की नीयत शुरू से ही सवालों के घेरे में थी और इस पूरे मसले को लटकाने की जुगत में भिड़ी सरकार अब अपने मकसद में काफी हद तक कामयाब होती भी दिखाई दे रही है। 
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